हिन्दुओं के लिए राहत : पाकिस्तानी संसद हिंदू विवाह को सरकारी सुबूत देगा, जबरन धर्मातरण पर लगेगी रोक ।

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इस कानुन के तहत लड़कों और लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम 18 वर्ष की उम्र निर्धारित की गई है, जिसमें  शादी के पंजीकरण, तलाक और दोबारा शादी के मामलों पर कानुन होगा।

इस्लामाबाद, लंबे इंतजार के बाद पाकिस्तान ने हिंदु के विवाह के लिए विधेयक पारित कर दिया। विवाद में चल रहे इस विधेयक को संशोधन के बाद सर्वसम्मति से राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद पारित किया गया है। इस विधेयक के लागु होने से  पहली बार पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों को पहचान मिली है और अल्पसंख्यक होने का अधिकार मिला है। इस विधेयक को पारित करने के लिए किसी भी समुदाय के लोग विरोध नहीं किया।

जैसा कि आपको बता दें पाकिस्तान में हिन्दुओं की जिंदगी बदतर है। खासकर महिलाओं की बात करें तो, वहाँ हिन्दु महिलाओं को जबरन धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम से शादी करवा दिया जाता है।

इस विधेयक को संसद का निचला सदन नेशनल असेंबली 26 सितंबर, 2015 को पारित कर चुकी है। राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद यह कानून में तब्दील हो जाएगा। इससे हिंदू महिलाओं के जबरन धर्मातरण पर रोक लगेगी।

विधेयक में लड़कों और लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम 18 वर्ष की उम्र निर्धारित की गई है। बनने वाला कानून शादी, शादी के पंजीकरण, तलाक और दोबारा शादी के मामलों पर लागू होगा। इससे पाकिस्तानी ¨हदू महिलाओं को उनकी शादी का सरकारी सुबूत मिलेगा। यह हिंदू पर्सनल लॉ पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रदेशों में लागू होगा। सिंध प्रांत की विधानसभा ने खुद का हिंदू पर्सनल लॉ बनाकर उसे पहले से ही लागू किया हुआ है। डॉन न्यूज के अनुसार विधेयक के मसौदे का पाकिस्तान में रहने वाले ज्यादातर हिंदुओं ने समर्थन किया है।

हिन्दुओं की बदतर हालात

मूवमेंट फॉर सॉलिडेरिटी एंड पीस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में सलाना करीब 1 हजार हिंदु लड़कियों को जबरन धर्म परिवर्तन करवाकर मुस्लिम लड़कों से शादी करवा दिया जाता था। इस 1 हजार में करीब 700 ईसाई महिलाएँ हैं और करीब 300 हिन्दु महिलाएँ हैं।

हिन्दुओं के लिए बड़ी राहत

इस कानुन के तहत धर्म परिवर्तन पर रोक लगेगी। हिंदू अल्पसंख्यकों को पहचान मिलेगी और अल्पसंख्यक होने का अधिकार मिलेगा।

नये कानून के बारे में

– इस कानुन में लड़के और लड़कियों कि न्यूनतम आयु 18 वर्ष से तय की गइ है।

– हिंदु के शादी का रजिस्ट्रेशन होगा जिसका रिकार्ड कोर्ट के पास भी होगी।

– विवाह विच्छेद के लिए कोर्ट में अर्जी देनी होगी।

– विवाह के नियमों का उल्लंघन करने पर दोषी को सजा मिलेगी।

– तलाकशुदा हिंदू महिला या पुरुष को दोबारा शादी करने की अनुमति मिलेगी।

– पति की मृत्यु के छह महीने बाद महिला को स्वेच्छा से विवाह करने का अधिकार होगा।

– इस कानून के अमल में आने के बाद मुस्लिमों में निकाहनामा की तर्ज पर पंडित शादी परथ मुहैया कराएंगे। इसके बाद संबंधित सरकारी विभाग में शादी का पंजीकरण कराया जा सकता है।

एक और नियम बदलने की मांग

हिंदू राजनेता और हिंदू समुदाय के सदस्य कानून में शामिल एक नियम में परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। इसके अंतर्गत दंपति में से किसी एक के द्वारा धर्म परिवर्तन करा लेने की स्थिति में दूसरा कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दे सकता है। समुदाय के लोगों को डर है कि कोई व्यक्ति इसका गलत फायदा उठा सकता है। इसलिए यदि दंपति में से कोई धर्म परिवर्तन करना चाहता हो तो पहले वह कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दे दे।

यहां होगा लागू

– पाकिस्तान के पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के हिंदुओं पर यह कानून लागू होगा।

– सिंध प्रांत ने अपना खुद का हिंदू विवाह कानून लागू किया हुआ है।

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