अब गाय की भी होगी आधार नंबर – मोदी सरकार ने गौ-तस्करी की रोकथाम के लिए उठाये बड़े कदम

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पिछले साल जब गायों के लिए यूआईडी की बात की गई थी तो इसका काफी मजाक और आलोचना की गई थी। लेकिन अब सरकार ने इसे उच्च स्तर तक ले जाने की अपनी मंशा साफ कर दी है।

भारत से बांग्लादेश में गाय की तस्करी सबसे ज्यादा होती है। इस तस्करी को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट सौंपी है और केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि संयुक्त सचिव, गृह मंत्रालय की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया. जिसमें कहा गया कि गाय के संरक्षण हेतु कुछ नियम बनाये जायें। इसमें यह भी माँग की गइ कि गाय का भी एक आधार नंबर (UID) हो जिससे गाय तस्करी कम हो।

सरकार ने कहा कि परित्यक्त पशुओं की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है । हर जिले में एक शेल्टर होम होना चाहिए, जिसकी क्षमता 500 जानवरों की होनी चाहिए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पुरे देश में हर गाय और उसकी संतान को एक यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर दिया जाना चाहिए, ताकि उन्हें आसानी से ट्रैक किया जा सके। और तस्करी रोकने में मदद मिलेगा।

रिपोर्ट में दूध न देने वाले जानवरों के लिए विशेष देखरेख की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही पशुओं को दुध देने के उम्र खत्म हो जाने के बाद किसानो को सरकार द्वारा मदद की भी बात की गइ है।

क्या खास होगा आईडी में

जैसा कि आपको बता दें यूनिक आईडी नंबर में गाय की उम्र, नस्ल, लिंग, स्तनपान, ऊंचाई, शरीर, रंग, सींग प्रकार, पूंछ आदि की जानकारी होगी।

बांग्लादेश में भारतीय गायों की मिलती है मुंह मांगी कीमत

बांग्लादेश गौ तस्करी का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है और यहाँ भारतीय गायों की मुंह मांगी कीमत चुकायी जाती है। इसके अलावा भारत में असम में भी गौ-तस्करी चरम पर है। बता दें कि हर साल करीब साढ़े तीन लाख गायों की सीमापार तस्करी की जाती है।

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