मोदी ने कहा, नोटबंदी का निर्णय गलत साबित हुआ तो जिम्मेदारी मेरी और कहा कि…..

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नोटबंदी को लेकर पुरा देश परेशान है और पुरे देश चर्चा में है, यह सरकार का बहुत ही ठोस कदम और ऐतिहासिक निर्णय है जिससे पूरा देश प्रभावित है.

संसद में विपक्ष के कारण कामकाज ठप है और आम लोगों का जीवन भी पूरी तरह प्रभावित है. सरकार ने यह फैसला काला धन को खत्म करने के लिए है और इस निर्णय से देश के 86 प्रतिशत कैश बेकार हो गया, इस वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

किस-किस को पहले से पता था नोटबंदी के बारे में….

राइट्‌र्स डॉटकॉम के अनुसार सरकार ने यह ऐतिहासिक फैसले के साथ थे चंद ब्यूरोक्रेट्‌स जिनमें हंसमुख अधिया और पांच अन्य शामिल थे। इनके अलावा कुछ युवा लोगों की टीम भी शामिल थी जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल्ली आवास के दो कमरों में दिन रात रिसर्च वर्क कर रही थी जिससे 500 और 1000 रूपये के नोट बंद करने का फैसला सामने आया।

इसे गोपनीय इसलिए रखा गया था क्योंकि इन रुपयों को कैश की बजाय सोने और संपत्ति में परिवर्तित ना कर लिया जाये,

प्रधानमंत्री मोदी ने इस फैसले को लागू करने के लिए काफी रिस्क लिया है और वे यह भी जानते हैं कि अगर यह निर्णय गलत साबित हुआ, तो सारा दोष उनका ही माना जाएगा। मोदी ने यह भी कहा कि कि आठ नवंबर को कैबिनेट की बैठक मैं पूरा रिसर्च कर यह निर्णय करने का फैसला किया है और अगर कुछ भी गलत हुआ तो दोषी मैं ही रहेगा।

नोटबंदी के फैसले के बाद तुरंत ही उत्तर प्रदेश में 2017 में चुनाव होने वाले हैं. जिसका असर चुनाव पर देखने को मिलना तय है. मोदी की यह अहम फैसले का रिजल्ट समय  ही बतायेगा.

नोटबंदी का तमाम रिसर्च हंसमुख अधिया के नेतृत्व में मोदी के आवास में हुआ. अधिया मोदी के विश्वास पात्र हैं वे वर्ष 2003-06 तक मोदी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहे जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे.58 वर्षीय अधिया उसी समय से मोदी के भरोसेमंद हैं और उन्होंने ने ही योग से मोदी को परिचित कराया था.

वर्ष 2015 में अधिया रेवेन्यू सेक्रेटरी बने औपचारिक रूप से वे वित्तमंत्री को रिपोर्ट करते हैं, लेकिन उनका सीधा संपर्क नरेंद्र मोदी से है. मोदी और अधिया जब साथ होते हैं तो गुजराती में बात करते हैं. नोटबंदी की घोषणा के बाद अधिया ने ट्‌वीट किया था कि कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए यह सरकार का सबसे बड़ा और बोल्ड निर्णय है.

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