भारत की आजादी गाँधी ने करवाया, यह कहना गलत है, और देश के क्रांतिकारियों और शहीदों का अपमान है..

0
661

स्वतंत्रता संग्राम के महान नायक जिनकी वजह से भारत को मिली आजादी….

महात्मा गाँधी
सुभाष चंद्र बोस
खुद्दीराम बोस
चंद्रशेखर आजाद
भगत सिंह
सुखदेव
राजगुरु
बाल गंगाधर तिलक
यतीन्द्रनाथ मुखर्जी

आज़ाद था, आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा : वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद

जैसा कि आप सभी भारत के इतिहास के बारे में पहले भी पढ़ चुके होंगे, भारत सबसे धनी देश था और इसी कारण से सारे देश के राजा महाराजा का नजर भारत देश पर था। भारत को पहले सोने की चिड़िया भी कहा जाता था।

भारत एक ऐसा देश है जिस पर अलग अलग देश के राजा शासन करते रहे जिसमें मुस्लिम शासक सबसे लम्बी अवधि तक शासन किया ।

अंग्रेजों से भारत की गुलामी

बात करें अंग्रेजों से भारत की गुलामी की तो, अंग्रेजों की चाल इतनी बदतर थी कि भारत के राजा महराजाओं को भ्रष्ट करके फुट डालकर भारत को गुलाम बना लिया. और हाल इतना बुरा हुआ कि भारत की पुरी जनता अंग्रेजों की मुट्टी में कैद हो गई और कोई भी भारतीयों के हाथ में आजादी का कोइ चारा नहीं बचा। उसके बाद धिरे-धिरे अंग्रेजों का इतना दबदबा बढ़ गया कि एक दुसरे में फुट डालकर भारत को लुटते रहे, भारत की जनता बिलकुल गुलाम हो गइ, अंग्रेज जो कहता था उसे भारतीयों को करना पड़ता था, भारतीयों को अच्छे पोस्ट पर नौकरी भी न देने लगा, लोग भुखे मरने लगे इतना ही नहीं भारत की विभाजन की षड़यन्त्र रचने लगे। धोखाधड़ी, अनैतिकता एवं भ्रष्टाचार के माध्यम से पुरे देश को लुटा और भारत के लोगों को गरीबी और भुखमरी के मुँह में धकेल दिया। भारत की संपति लुटकर ब्रिटेन को मालामाल कर दिया। इतना सब झेलने के बाद भारत की जनता परेशान होकर कम्युनिटी बनाने को सोचने लगे।

भारत के लोग कोइ भी आवाज उठाते तो उसे जेल में हमेशा के लिए बंद कर दिया जाता था, और फाँसी में लटका दिया जाता था।

1930 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अंग्रेजो से पूर्ण स्वराज की मांग की थी।

UNSPECIFIED - CIRCA 1800: Attack of the mutineers on the Redan Battery at Lucknow July 30 1857 From The History of the Indian Mutiny published 1858 (Photo by Universal History Archive/Getty Images)

लेकिन अंग्रेज इतना आसानी से कहाँ छोड़ने वाले जहाँ देश की राजगद्दी मिली हो और सारी जनता उनके मुट्टी में हो..

भारत के वीर जवान की भी दाद देनी होगी जो इतनी आसानी से कभी हार नहीं मानी … जहाँ अंग्रेजों की पुरी टोली लाखों सैनिक, यहाँ तक की 25 लाख से ज्यादा भारतीयों को अंग्रेजो की सेना में शामिल कर लिया गया था, इसके बावजुद हमारे सेना हार मानने को तैयार नहीं और अंग्रेजो के छक्के छुड़ाने में आगे बढ़ते रहे..

60 हज़ार भारतियों की सेना लेकर बोस अंग्रेजो से लड़ रहे थे, जिसमें 40 हजार भारतीय सैनिक शहीद हो चुके थे, लेकिन हर भारतीयों के खुन में यही जोश था कि आजादी लिये बिना हम वापस नहीं लौटेंगे। भारतीय सेना इतनी कम थी इसके अलावा अगर अंग्रेज की सेना 1 मरती थी तो भारतीय सेना 15 मरते थे फिर भी हमारी सेना आजादी के लिए आगे बढ़ती जा रही थी। सुभाष चंद्र बोस “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा” का नारा लगा रहे थे और आगे बढ. रहे थे।

अंग्रेज तब हार मानना शुरु कर दिये जब यूरोप से दूसरा विश्व युद्ध जीतकर लगभग 25 लाख भारतीय सैनिक वापस भारत में लौट आये , इसके बाद अंग्रेजी हुकूमत को पता चला कि यूरोप से लौटे भारतीय सैनिक आज़ाद हिन्द फ़ौज में शामिल होते जा रहे है..और समझने लगे कि अब अंग्रेज पर खतरा मँडराने लगा और इसी डर से धिरे धिरे अंग्रेज भारत को छोड़ने लग गये।

भारत में ऐसे वीर थे कि कभी भी अपनी हार नहीं मानते और दुश्मनों के छक्के छुड़ा देते थे, यही कारण है कि अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा।

अंग्रेज रातों रात, हड़बड़ में गाँधी-नेहरू-जिन्ना को भारत सौंपकर, सबकुछ छोड़कर चले गए

बहुत लंबी लड़ाई और हजारों कुरबानियों के कारण हमारा देश 15 अगस्त 1947 की आधी रात को अंग्रेजों से मुक्त करवाया गया। भारत के स्वाधीनता संग्राम की शुरुआत 1857 मे हुए सिपाही विद्रोह को माना जाता है। स्वाधीनता के लिए हजारों लोगो ने जान की बली दी।

इसी दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने दिल्ली के लाल किले पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर स्वाधीनता का ऐलान किया।

नेपाल एक ऐसा देश है जो किसी का आजतक गुलाम नहीं हुआ।

loading...

LEAVE A REPLY