हरभजन क्रिकेट कि दुनिया छोड़कर अभी राजनिति में आने से मना कर दिया…

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चंडीगढ़, हरभजन सिंह क्रिकेट कि दुनिया में धूम मचाने वाले अभी क्रिकेट में ही अपना दिलचस्प दिखा रहे हैं।

भारत के जाने माने स्टार स्पिनर हरभजन सिंह कुछ दिनों से कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा में हैं वहीं हरभजन खुद मिडिया से बात करते हुए फिलहाल राजनिति में कदम रखने से मना कर दिया है, उन्होंने कहा कि हमारी रुची अभी क्रिकेट में ही है, और हमारा लक्ष्य अभी 3-4 साल तक क्रिकेट खेलने का है।

जबकि अफवाह ये है कि वे कांग्रेस में शामिल होंगे और जालंधर से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे लेकिन अफवाह फैलते ही हरभजन मिडिया के सामने आये और साफ मना कर दिया कि उनकी कोई भी रुची राजनिति में नहीं है।

वहीं कुछ लोग मन बनाए थे कि यदि हरभजन कांग्रेस में शामिल हुए तो जालंधर से टिकट लेंगे और विधानसभा चुनाव लड़ने मैदान में उतरेंगे …यह भी बताया जा रहा था कि वह नवजोत सिंह सिद्धू के साथ नई दिल्ली में कांग्रेस में शामिल होंगे, और अगर ऐसा हुआ तो यह कांग्रेस का पंजाब में लाजवाब वापसी होगी।

कैसे यह अफवाह फैली कि हरभजन काँग्रेस में शामिल होना चाहते है..???

हरभजन जनता और मिडिया से अपिल करते हुए कहा कि हमारा अभी राजनिति में आने का कोई इरादा नहीं है और इस अफवाह को न फैलाएँ। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 7 – 8 महिने पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह से कांग्रेस में शामिल होने की बात हुई थी लेकिन मैं राजनिति में कोइ रुची नहीं रखता और हमारा लक्ष्य 3- 4 साल तक क्रिकेट खेलना है और इसके बाद ही कुछ सोचुँगा।

हरभजन ने यह भी कहा कि मैं सभी नेताओं को साफ बता दिया था कि मेरा किसी पार्टी में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है ।

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर के बयान से चर्चा को मिला बल

कांग्रेस की एक चर्चा में कैप्टन अमरिंदर सिंह से पुछा गया कि क्या हरभजन सिंह कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं उन्होंने कहा कि अगर हरभजन कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं तो उनका कांग्रेस में स्वागत है। अगर वह कांग्रेस में आते हैं तो हमें बेहद खुशी होगी।’

चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के नतीजों से काँग्रेस का नया एजेंडा….

कांग्रेस की चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में करारी हार के बाद पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी शुरू कर दी है, और यही वजह है कि हरभजन को कांग्रेस में शामिल करने का मुद्दा तेजी से उछालना।

करारी हार को देखते हुए हर कोशिश पुरी की जा रही है कि विधानसभा के चुनाव को बेकार न जानें दिया जाए और तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ा जाय।

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